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अमीर खुसरो की रचनाएँ - Amir Khusro Books in Hindi

  अमीर खुसरो की रचनाएँ - Amir Khusro Books in Hindi दिल्ली सल्तनतकालीन अन्य लेखकों में अमीर खुसरो का नाम सर्वाधिक उल्लेखनीय है. जबकि सही अर्थों में वह इतिहासकार नहीं था. उनका जन्म 1253 ई. में हुआ था. वह एक ऐसे परिवार में पैदा हुए थे जिसका कई पीढ़ियों से राजदरबार से घनिष्ठ सम्बन्ध था. वह कैकूबाद, जलालुद्दीन खिलजी, अलाउद्दीन खिलजी, मुबारकशाह व गयासुद्दीन तुगलक के अंतर्गत शाही सेवा में रहे. अमीर खुसरो सूफियों - विशेष रूप से निजामुद्दीन औलिया के काफी नजदीक थे और उन्होंने अपने काव्य व संगीत के माध्यम से भारत की सूफी संस्कृति के निर्माण में महान योगदान दिया था. चलिए चर्चा करते हैं अमीर खुसरो (Amir Khusro) द्वारा रचित ग्रन्थ, किताबों (Books) के बारे में. अमीर खुसरो का झुकाव इतिहास लिखना अमीर खुसरो की मूल चिंता नहीं थी. इसलिए सच पूछा जाए तो एक इतिहासकार के रूप में उनका मूल्यांकन नहीं किया जा सकता. परन्तु अपनी कविताओं में उन्होंने प्रायः ऐतिहासिक विषयों को लिया है. इस प्रकार की सभी कृतियाँ, रचनाएँ सन 1289-1325 के बीच रची गई थीं. इनमें से कुछ की रचना के लिए उनसे ख़ास तौर पर कहा गया था जबकि कुछ...

बोस्टन की चाय-पार्टी की घटना क्या थी?

  बोस्टन की चाय-पार्टी की घटना क्या थी? ब्रिटिश संसद ने चाय के व्यापार के सम्बन्ध में नया कानून बनाया था. इस कानून के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी को अमेरिका में चाय भेजने की अनुमति दी गई थी. चाय के व्यापार को बढ़ाने के लिए मूल्य में कमी की गई थी. फलस्वरूप अमेरिकनों को सस्ती चाय मिल जाती थी और ईस्ट इंडिया कंपनी को भी आर्थिक लाभ हो जाता था. लेकिन अमेरिकन उपनिवेशवासियों ने इसे ब्रिटिश सरकार की चाल समझा. उन्होंने सोचा कि यदि संसंद व्यापारिक मामलों पर एकाधिकार कायम कर लेगी तो इससे उपनिवेश के व्यापार को हानि होगी. ईस्ट इंडिया कंपनी के कुछ जहाज बोस्टन बंदरगाह में ठहरे हुए थे. बोस्टन के नागरिकों ने जहाज़ों को लूट लिया और लगभग 342 चाय के बक्सों को समुद्र में फेंक दिया. इसे ही ' बोस्टन की चाय-पार्टी दुर्घटना (Boston tea-party incident) ” कहा जाता है. बोस्टन की चाय-पार्टी घटना के परिणाम इस घटना से इंग्लैंड में उत्तेजना फैली. ब्रिटिश संसद ने दमन की नीति का समर्थन किया और मेसाचुसेट्स एक्ट (Massachusetts Act) पास किया. इस कानून के द्वारा ब्रिटिश सैनिक कमांडर को अमेरिकन प्रान्तों का राज्यपाल बनाया गया...

औद्योगिक क्रांति - Industrial Revolution in Hindi

  'क्रांति” शब्द से साधारणतया आकस्मिक उथल-पुथल का बोध होता है. लेकिन औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के साथ हम वैसी बात नहीं पाते हैं. साधारणतः लोहे, काँसे और दूसरी-दूसरी चीजों के उत्पादन के ढंग में आमूल परिवर्तन को 'औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution)” की संज्ञा दी जाती है. दस्तकारी के स्थान पर वैज्ञानिक अनुसंधानों के परिणामस्वरूप कारखानों का जन्म हुआ, उत्पादन में वृद्धि हुई. संक्षेप में, औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) का अभिप्राय उन परिवर्तनों से है जिन्होंने यह संभव कर दिया कि मनुष्य उत्पादन के प्राचीन तरीकों को छोड़कर बड़ी मात्रा बड़े-बड़े कारखानों में वस्तुओं का उत्पादन कर सके. इतिहासकार  रायकर  ने औद्योगिक क्रान्ति को परिभाषित करते हुए कहा है कि - 'दस्तकारी के स्थान पर वास्पयंत्रों द्वारा चालित उत्पादन और यातायात की प्रक्रियाओं में सामान्य रूप से परिवर्तन लाना ही औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) थी.” 1760 ई. से लेकर 1840 ई. तक Europe में अकस्मात् औद्योगिक प्रक्रिया में नई-नई चीजें हुईं, जिन्हें कुल मिलाकर औद्योगिक क्रांति का नाम दिया गया....

इटली का एकीकरण - Unification of Italy in Hindi

  एकीकरण के पूर्व इटली एक 'भौगोलिक अभिव्यक्ति” मात्र था. वह अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था. राज्यों में मतभेद था और सभी अपने स्वार्थ में लिप्त थे. एकीकरण (Unification) के मार्ग में अनेक बाधाएँ थीं. लेकिन इटली (Italy) के कुछ प्रगतिवादी लोगों ने एकता की दिशा में कदम उठाया. इटली के एकीकरण (Unification of Italy) में आर्थिक तत्त्वों की भूमिका महत्त्वपूर्ण थी. इटली के एकीकरण में सबसे अधिक योगदान रेलवे के विकास था. इटली में राष्ट्रीय आन्दोलन चलाने के लिए अनेक गुप्त समितियों का संगठन किया गया. इन गुप्त समितियों में कार्बोनरी प्रमुख था. इसके नेतृत्व में 1831 ई. तक इटली का एकता-आन्दोलन चलता रहा.  मेजिनी (Giuseppe Mazzini)  को इटली के राष्ट्रीय आन्दोलन का पैगम्बर कहा जाता है. उसने 'युवा इटली” नामक संस्था की स्थापना की. इसके सदस्यों ने मजदूरों और गाँवों तथा नगरों के लोगों के बीच चेतना फैलायी. 1848 ई. की क्रांति का प्रभाव भी इटली पर पड़ा था.  काबूर (Camillo Benso, Count of Cavour) और गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi)  ने भी इटली के राष्ट्रीय एकीकरण (Unification of Italy)...

इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति -Glorious Revolution 1688 in Hindi

  जेम्स द्वितीय 1685 ई. में इंग्लैंड का राजा बना. उसे बहुत सुरक्षित सिंहासन प्राप्त हुआ था. परिस्थिति राजतंत्र के पक्ष में थी. विरोधी दल कुचला जा चूका था. राज्य के प्रति निर्विरोध आज्ञाकारिता का सिद्धांत स्वीकृत हो चूका था. संसद के अधिकांश सदस्य राजा के दैवी अधिकार सिद्धांत के समर्थक थे. जेम्स द्वितीय ने स्वयं ही परिस्थिति को विपरीत बना दिया और उसे अंततोगत्वा गद्दी छोड़कर भागना पड़ा. 1688 ई. में हुए इंग्लैंड की क्रांति को 'गौरवपूर्ण क्रांति (Glorious Revolution)” भी कहा जाता है. इंग्लैंड की क्रांति संक्षेप में 1688 ई. की क्रांति जेम्स द्वितीय के शासनकाल में हुई थी. क्रांति के लिए जेम्स द्वितीय ने खुद वातावरण तैयार किया था. उसके कार्यों से सभी दल के लोग असंतुष्ट थे. उन्हें विश्वास हो गया था कि राजा स्वेच्छाचारी शासन की पुनरावृत्ति करना चाहता है. जेम्स द्वितीय रोमन  कैथोलिक चर्च की शक्ति को बढ़ाना चाहता था. वह कैथलिकों को राज्य के महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्त करना चाहता था. वह किसी भी कानून को स्थगित अथवा रद्द करने के अधिकार द्वारा अपनी सत्ता को सर्वोपरि बनाना चाहता था. वह टेस...

अमेरिका का स्वतंत्रता-संग्राम - American Revolution

  आपको पता ही होगा कि क्रिस्टोफ़र कोलम्बस ने अमेरिका का पता लगाया था. अमेरिका का पता लगने के बाद यूरोप के बड़े-बड़े धनवान लोगों ने अमेरिका को बाँटना शुरू कर दिया. स्पेन, पुर्तगाल, हॉलैंड, फ्रांस औरइंग्लैंड ने वहाँ अपनी बस्तियाँ बसायीं. अमेरिका में अंग्रेजों के 13 उपनिवेश (Colonies) थे. उपनिवेशों में रहनेवाले अंग्रेज स्वतंत्रता-प्रेमी थे. वे अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मातृभूमि छोड़कर उपनिवेशों में जा बसे थे. लेकिन जब  जॉर्ज तृतीय (George III of the United Kingdom)  ने उपनिवेशों पर अपना निरंकुश शासन लादना चाहा तो स्वतंत्रता-प्रेमी उपनिवेशवासियों ने विद्रोह कर दिया. किसी भी देश में क्रांति की बीज वहाँ की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक अवस्थाओं में छिपा रहता है जो अनुकूल परिस्थिति पाकर प्रस्फुटित होता है. अमेरिका के स्वतंत्रता-संग्राम ( American Revolution) ने सर्वप्रथम  यह उदाहरण उपस्थित किया कि जागृत राष्ट्रीय भावना को कुचलना मुश्किल है…याद कीजिये हमने  1857 की भारतीय क्रांति  में क्या पढ़ा था? अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम (American Revolution) ने...

विश्व इतिहास] फ्रांस की क्रांति - 1789 French Revolution

  फ्रांस की क्रांति (French Revolution): भूमिका 18वीं शताब्दी के 70-80 के दशकों में विभिन्न कारणों से राजा और तत्कालीन राजव्यवस्था के प्रति फ्रांस के नागरिकों में विद्रोह की भावना पनप रही थी. यह विरोध धीरे-धीरे तीव्र होता चला गया. अंततोगत्वा 1789 में  राजा लुई 16वाँ (Louis XVI)  को एक सभा बुलानी पड़ी. इस सभा का नाम  General State  था. यह सभा कई वर्षों से बुलाई नहीं गयी थी. इसमें सामंतों के अतिरिक्त सामान्य वर्ग के भी प्रतिनिधि होते थे. इस सभा में जनता की माँगों पर जोरदार बहस हुई. स्पष्ट हो गया कि लोगों में व्यवस्था की बदलने की बैचैनी थी. इसी बैचैनी का यह परिणाम हुआ कि इस सभा के आयोजन के कुछ ही दिनों के बाद सामान्य नागरिकों का एक जुलूस  बास्तिल नामक जेल  पहुँच गया और उसके दरवाजे तोड़ डाले गए. सभी कैदी बाहर निकल गए. सच पूंछे तो नागरिक इस जेल को जनता के दमन का प्रतीक मानते थे. कुछ दिनों के बाद महिलाओं का एक दल राजा के  वर्साय स्थित दरबार  को घेरने निकल गया जिसके फलस्वरूप राजा को पेरिस चले जाना पड़ा. इसी बीच General State ने कई क्रांतिकारी कदम भी उठ...

जर्मनी का एकीकरण - Unification of Germany in Hindi

  19वीं सदी के पूर्वार्द्ध में जर्मनी भी इटली की तरह एक 'भौगोलिक अभिव्यक्ति” मात्र था. जर्मनी अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था. इन राज्यों में एकता का अभाव था. ऑस्ट्रिया जर्मनी के एकीकरण (Unification of Germany) का विरोधी था. आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से जर्मनी पिछड़ा और विभाजित देश था. फिर भी जर्मनी के देशभक्त जर्मनी के एकीकरण (Unification of Germany) के लिए प्रयास कर रहे थे. कुछ ऐसी घटनाएँ घटीं जिनसे जर्मन एकता को बल मिला. जर्मनी की औद्योगिक प्रगति हुई. वाणिज्य-व्यापार का विकास हुआ. नेपोलियन प्रथम ने जर्मन राज्यों का एक संघ स्थापित कर राष्ट्रीय एकता का मार्ग प्रशस्त किया. जर्मनी के निवासी स्वयं को एक राष्ट्र के रूप में देखने लगे.  1830 ई और 1848 ई. की क्रांतियों  के द्वारा जर्मनी के लोगों में एकता आई और वे संगठित हुए. प्रशा (Persia) के नेतृत्व में आर्थिक संघ की स्थापना से राष्ट्रीय एकता की भावना को बल मिला. इससे राजनीतिक एकीकरण को भी प्रोत्साहन मिला. औद्योगिक विकास ने राजनीतिक एकीकरण को ठोस आधार प्रदान किया.  जर्मनी का पूँजीपति वर्ग आर्थिक विकास और व्यापार की प...

यूरोप का पुनर्जागरण - Renaissance in Europe

  पुनर्जागरण (Renaissance in Europe) का शाब्दिक अर्थ होता है, 'फिर से जागना”. चौदहवीं और सोलहवीं शताब्दी के बीच यूरोप में जो सांस्कृतिक प्रगति हुई उसे ही 'पुनर्जागरण” कहा जाता है. इसके फलस्वरूप जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नवीन चेतना आई. यह आन्दोलन केवल पुराने ज्ञान के उद्धार तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इस युग में कला, साहित्य और विज्ञान के क्षेत्र में नवीन प्रयोग हुए. नए अनुसंधान हुए और ज्ञान-प्राप्ति के नए-नए तरीके खोज निकाले गए. इसने परलोकवाद और धर्मवाद के स्थान पर मानववाद को प्रतिष्ठित किया. पुनर्जागरण वह  आन्दोलन  था जिसके द्वारा पश्चिम के राष्ट्र मध्ययुग से निकलकर आधुनिक युग के विचार और जीवन-शैली अपनाने लगे. यूरोप के निवासियों ने भौगोलिक, व्यापारिक, सामजिक तथा आध्यात्मिक क्षेत्रों में प्रगति की. इस युग में लोगों ने मध्यकालीन संकीर्णता छोड़कर स्वयं को नयी खोजों, नवीनतम विचारों तथा सामजिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक उन्नति से सुसज्जित किया. प्रत्येक क्षेत्र में सर्वथा नवीन दृष्टिकोण, आदर्श और आशा का संचार हुआ. साहित्य, कला, दर्शन, विज्ञान, वाणिज्य-व्यवसाय, समाज और राजनीति प...

यूरोपियन यूनियन (European Union) का विकास और उसके अंग

  परिचय यूरोपियन यूनियन यूरोपीय देशों का राजनैतिक व आर्थिक संगठन है. इसका विकास विभिन्न स्तरों पर हुआ है अर्थात यूरोपियन यूनियन की स्थापना किसी एक समझौते या संधि द्वारा नहीं बल्कि विभिन्न संधिओं तथा उनमे संशोधन के बाद हुई है. इसके विकास में  'पेरिस की संधि (1951)”,”रोम की संधि (1957)”,”मास्त्रिच की संधि (1993)” तथा 'लिस्बन की संधि (2009)” का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वर्तमान में ब्रिटेन के यूनियन से बाहर हो जाने के बाद इसके केवल 27 सदस्य रह जायंगे. यूरोपियन यूनियन ने यूरोपीय देशों के राजनितिक व आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जिससे यह संगठन विश्व की लगभग 22% अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है. यूरोपियन यूनियन की अपनी संसद,आयोग,मंत्रिपरिषद,परिषद्,न्यायालय तथा केंद्रीय बैंक है जिन्हें यूनियन के प्रमुख अंग भी कहा जाता है .यूरोपियन यूनियन की सांझी मुद्रा(Currency) यूरो(Euro) है जिसे यूनियन के केवल 19 सदस्य देशों द्वारा ही अपनाया गया है. शेनजेन संधि (1985) के द्वारा यूनियन ने अपने सदस्य देशों के नागरिकों को बिना पासपोर्ट के यूरोप के किसी भी देश में भ्रमण करने का अध...

प्रथम विश्वयुद्ध - First World War [1914-18]

  प्रथम विश्वयुद्ध की भूमिका (Background of First World War) 1914-18 ई. का प्रथम विश्वयुद्ध (First World War) साम्राज्यवादी राष्ट्रों की पारस्परिक प्रतिस्पर्द्धा का परिणाम था. प्रथम विश्वयुद्ध का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण गुप्त संधि प्रणाली थी. यूरोप में गुप्त संधि की प्रथा जर्मन चांसलर बिस्मार्क ने शुरू की थी. इसने यूरोप  को दो विरोधी गुटों में विभाजित कर दिया. दो गुटों के बीच एक-दूसरे के प्रति संदेह और घृणा का भाव बढ़ता गया. राजनीतिक वातावरण दूषित हो गया. 1879 ई. में जर्मनी ने ऑस्ट्रिया-हंगरी (Austria-Hungary) के साथ गुप्त संधि की. 1882 ई. में इटली भी इस गुट में शामिल हो गया. इस प्रकार  त्रिगुट  का निर्माण हुआ. 1887 ई. में जर्मनी और रूस दोनों मिल गए. विश्व राजनैतिक अखाड़े में फ्रांस अकेला पड़ गया. फ्रांस को अपमानित करने के लिए ही जर्मनी ने इन देशों के साथ संधि की थी. फ्रांस प्रतिशोध की आग में अन्दर ही अन्दर जल रहा था. इसलिए 1894 ई. में फ्रांस ने रूस से संधि की. उधर इंग्लैंड ने 1902 ई. में जापान के साथ, 1904 ई. में फ्रांस और 1907 ई. में रूस के साथ संधि कर ली.  इस प्र...

गुरुनानक

1469 AD में गुरु नानक का जन्म तलवंडी (वर्तमान में लाहौर, पाकिस्तान) के हिन्दू परिवार के महाजन जाति  में  मेहता कालू (पिता ) और माता  तृप्ता देवी  के घर हुआ, गुरु नानक प्रथम सिख  गुरु बने और सिख धर्म की नींव रखी | (वर्तमान समय में इनका जन्मदिवस कार्तिक  माह की  15वीं पूर्णिमा को मनाया जाता है ) आध्यात्मिक झुकाव, दुनिया और उसके सिद्धांतों के बारे में जागरूकता और दिव्य विषयों के प्रति रुचि के बारे में टिप्पणियाँ उनके जीवन के प्रारम्भिक काल से मिलती हैं जहां प्रतीकों  और घटनाओं के बारे में  नैतिकता और सार्वभौमिकता की विवेचना की गई है | नानक के पूर्व जीवन के बारे में हमे जानकारी 1475 AD में मिलती है जब वह अपनी बहन (बीबी नानकी) के साथ सुल्तानपुर चले गए जहां बीबी नानकी का विवाह हुआ | 16 वर्ष की उम्र में नानक ने दौलत खान लोदी के शासन में कार्य करना शुरू कर दिया |  नानक में दिव्य गुणों की पहचान सबसे पहली बार स्थानीय जमींदार राज बुल्लर और नानक की बहन बीबी नानकी ने की | इसके बाद उन्हें यात्राओं के लिए प्रोत्साहित किया गया और इन्होनें अपने जीवन के 2...

AMBUSH KI VISHESTAYEN

  Ambush  ko  kamyab  banane  ke  lie  kuch  zaruri  baten  is  prakar  se  hain:- Surprise.  Surprise  hasil  karne  ke  lie  kuch  bunyadi  baten  zaruri  hain  jo  is prakar  hain. (a)  Khamoshi. (b)  Samajh  aur  hoshiyari  ke  sath  layout  aur  siting. (c)  Security. Cont.  Ambush  ki  karwai  ke  dauran  cdr  ka  control  hona  nihayat  hi  zaruri  hai jisko  niche  likhi  baton  se  hasil  kiya  ja  sakta  hai:- (a) Achha  briefing.    (c)       Achhi  tarah  jane  hue  signal   (b)    Rehearsals. (d)    Cdr  ki  durust  posn.  (e)        Discp. Fire  Power.  Ky...

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Sadgati munshi prem chand story

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